उत्तर: “सूचना” का अर्थ है किसी भी रूप में कोई भी सामग्री, जिसमें रिकॉर्ड, दस्तावेज़, मेमो, ई-मेल, राय, सलाह, प्रेस विज्ञप्ति, परिपत्र, आदेश, लॉगबुक, अनुबंध, रिपोर्ट, नमूने, मॉडल, किसी भी इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखी गई डेटा सामग्री और जानकारी शामिल है। किसी भी निजी निकाय से संबंधित, जिस तक किसी सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा उस समय लागू किसी अन्य कानून के तहत पहुंच हो सकती है।
आरटीआई
उत्तर: “सूचना” का अर्थ है किसी भी रूप में कोई भी सामग्री, जिसमें रिकॉर्ड, दस्तावेज़, मेमो, ई-मेल, राय, सलाह, प्रेस विज्ञप्ति, परिपत्र, आदेश, लॉगबुक, अनुबंध, रिपोर्ट, नमूने, मॉडल, किसी भी इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखी गई डेटा सामग्री और जानकारी शामिल है। किसी भी निजी निकाय से संबंधित, जिस तक किसी सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा उस समय लागू किसी अन्य कानून के तहत पहुंच हो सकती है।
उत्तर: धारा -6(3): जहां सूचना के लिए अनुरोध करते हुए एक सार्वजनिक प्राधिकरण को आवेदन किया जाता है:
i. जो किसी अन्य सार्वजनिक प्राधिकरण के पास है; या
ii. जिसका विषय किसी अन्य सार्वजनिक प्राधिकरण के कार्यों से अधिक निकटता से जुड़ा हुआ है
वह सार्वजनिक प्राधिकरण, जिसके लिए ऐसा आवेदन किया गया है, आवेदन या उसके ऐसे हिस्से को जो उचित हो, अन्य सार्वजनिक प्राधिकरण को स्थानांतरित कर देगा और सूचित करेगा आवेदक को ऐसे स्थानांतरण के बारे में तुरंत जानकारी देनी होगी।
ऐसा आवेदन आवेदन प्राप्त होने की तारीख से 05 (पांच) दिनों के भीतर स्थानांतरित किया जाएगा।
उत्तर: धारा -6(3): जहां सूचना के लिए अनुरोध करते हुए एक सार्वजनिक प्राधिकरण को आवेदन किया जाता है:
i. जो किसी अन्य सार्वजनिक प्राधिकरण के पास है; या
ii. जिसका विषय किसी अन्य सार्वजनिक प्राधिकरण के कार्यों से अधिक निकटता से जुड़ा हुआ है
वह सार्वजनिक प्राधिकरण, जिसके लिए ऐसा आवेदन किया गया है, आवेदन या उसके ऐसे हिस्से को जो उचित हो, अन्य सार्वजनिक प्राधिकरण को स्थानांतरित कर देगा और सूचित करेगा आवेदक को ऐसे स्थानांतरण के बारे में तुरंत जानकारी देनी होगी।
ऐसा आवेदन आवेदन प्राप्त होने की तारीख से 05 (पांच) दिनों के भीतर स्थानांतरित किया जाएगा।
उत्तर: धारा-7(1): धारा 5 की उप-धारा (2) के परंतुक या धारा 6 की उप-धारा (3) के परंतुक के अधीन, केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी, जैसा भी मामला हो हो सकता है, धारा 6 के तहत अनुरोध प्राप्त होने पर, यथासंभव शीघ्रता से, और किसी भी मामले में अनुरोध प्राप्त होने के 30 (तीस) दिनों के भीतर, या तो निर्धारित शुल्क के भुगतान पर जानकारी प्रदान करें या अस्वीकार कर दें। धारा 8 और 9 में निर्दिष्ट किसी भी कारण से अनुरोध।
यदि मांगी गई जानकारी किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से संबंधित है, तो ऐसी स्थिति में अनुरोध प्राप्त होने के 48 (अड़तालीस) घंटों के भीतर जानकारी प्रदान की जाएगी।
उत्तर: धारा-7(1): धारा 5 की उप-धारा (2) के परंतुक या धारा 6 की उप-धारा (3) के परंतुक के अधीन, केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी, जैसा भी मामला हो हो सकता है, धारा 6 के तहत अनुरोध प्राप्त होने पर, यथासंभव शीघ्रता से, और किसी भी मामले में अनुरोध प्राप्त होने के 30 (तीस) दिनों के भीतर, या तो निर्धारित शुल्क के भुगतान पर जानकारी प्रदान करें या अस्वीकार कर दें। धारा 8 और 9 में निर्दिष्ट किसी भी कारण से अनुरोध।
यदि मांगी गई जानकारी किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से संबंधित है, तो ऐसी स्थिति में अनुरोध प्राप्त होने के 48 (अड़तालीस) घंटों के भीतर जानकारी प्रदान की जाएगी।
उत्तर: धारा-7(6): धारा-5 की उप-धारा (5) में निहित किसी भी बात के बावजूद, सूचना के लिए अनुरोध करने वाले व्यक्ति को सूचना नि:शुल्क प्रदान की जाएगी, जहां कोई सार्वजनिक प्राधिकरण समय सीमा का पालन करने में विफल रहता है। उपधारा(1) में निर्दिष्ट।
उत्तर: धारा-7(6): धारा-5 की उप-धारा (5) में निहित किसी भी बात के बावजूद, सूचना के लिए अनुरोध करने वाले व्यक्ति को सूचना नि:शुल्क प्रदान की जाएगी, जहां कोई सार्वजनिक प्राधिकरण समय सीमा का पालन करने में विफल रहता है। उपधारा(1) में निर्दिष्ट।
उत्तर: धारा 7(9): सूचना आम तौर पर उसी रूप में प्रदान की जाएगी जिसमें यह मांगी गई है, जब तक कि यह सार्वजनिक प्राधिकरण के संसाधनों का असंगत रूप से दुरुपयोग न करे या संबंधित रिकॉर्ड की सुरक्षा या संरक्षण के लिए हानिकारक न हो।
उत्तर: धारा 7(9): सूचना आम तौर पर उसी रूप में प्रदान की जाएगी जिसमें यह मांगी गई है, जब तक कि यह सार्वजनिक प्राधिकरण के संसाधनों का असंगत रूप से दुरुपयोग न करे या संबंधित रिकॉर्ड की सुरक्षा या संरक्षण के लिए हानिकारक न हो।
उत्तर: धारा-8(1): इस अधिनियम में किसी भी बात के होते हुए भी, किसी भी नागरिक को, देने की कोई बाध्यता नहीं होगी। परिचय जो अपराधियों की जांच या गिरफ्तारी या अभियोजन की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करेगा ।
उत्तर: धारा-8(1): इस अधिनियम में किसी भी बात के होते हुए भी, किसी भी नागरिक को, देने की कोई बाध्यता नहीं होगी। परिचय जो अपराधियों की जांच या गिरफ्तारी या अभियोजन की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करेगा ।
उत्तर: Section -11(1): जहां एक केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या एक राज्य लोक सूचना अधिकारी, जैसा भी मामला हो, इस अधिनियम के तहत किए गए अनुरोध पर किसी भी जानकारी या रिकॉर्ड या उसके हिस्से का खुलासा करने का इरादा रखता है, जो किसी तीसरे पक्ष से संबंधित है या उसके द्वारा आपूर्ति की गई है और है उस तीसरे पक्ष द्वारा गोपनीय माना गया है, केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी, जैसा भी मामला हो, अनुरोध की प्राप्ति से पांच दिनों के भीतर, ऐसे तीसरे पक्ष को अनुरोध की एक लिखित सूचना देगा और तथ्य यह है कि केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी, जैसा भी मामला हो, जानकारी या रिकॉर्ड, या उसके हिस्से का खुलासा करने का इरादा रखता है, और तीसरे पक्ष को इस संबंध में लिखित या मौखिक रूप से प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित करता है कि क्या जानकारी खुलासा किया जाना चाहिए, और जानकारी के प्रकटीकरण के बारे में निर्णय लेते समय तीसरे पक्ष की ऐसी प्रस्तुति को ध्यान में रखा जाएगा
उत्तर: Section -11(1): जहां एक केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या एक राज्य लोक सूचना अधिकारी, जैसा भी मामला हो, इस अधिनियम के तहत किए गए अनुरोध पर किसी भी जानकारी या रिकॉर्ड या उसके हिस्से का खुलासा करने का इरादा रखता है, जो किसी तीसरे पक्ष से संबंधित है या उसके द्वारा आपूर्ति की गई है और है उस तीसरे पक्ष द्वारा गोपनीय माना गया है, केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी, जैसा भी मामला हो, अनुरोध की प्राप्ति से पांच दिनों के भीतर, ऐसे तीसरे पक्ष को अनुरोध की एक लिखित सूचना देगा और तथ्य यह है कि केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी, जैसा भी मामला हो, जानकारी या रिकॉर्ड, या उसके हिस्से का खुलासा करने का इरादा रखता है, और तीसरे पक्ष को इस संबंध में लिखित या मौखिक रूप से प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित करता है कि क्या जानकारी खुलासा किया जाना चाहिए, और जानकारी के प्रकटीकरण के बारे में निर्णय लेते समय तीसरे पक्ष की ऐसी प्रस्तुति को ध्यान में रखा जाएगा
उत्तर: धारा -19(1): कोई भी व्यक्ति, जिसे धारा 7 की उपधारा (3) के खंड (ए) में उप-धारा (1) में निर्दिष्ट समय के भीतर निर्णय नहीं मिलता है, या किसी से व्यथित है। जैसा भी मामला हो, केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी का निर्णय, ऐसी अवधि की समाप्ति से या ऐसे निर्णय की प्राप्ति से तीस दिनों के भीतर ऐसे अधिकारी को अपील कर सकता है जो रैंक में वरिष्ठ है केंद्रीय लोक प्राधिकरण.
बशर्ते कि ऐसा अधिकारी तीस दिन की अवधि की समाप्ति के बाद अपील स्वीकार कर सकता है यदि वह संतुष्ट है कि अपीलकर्ता को समय पर अपील दायर करने से पर्याप्त कारण से रोका गया था।
उत्तर: धारा -19(1): कोई भी व्यक्ति, जिसे धारा 7 की उपधारा (3) के खंड (ए) में उप-धारा (1) में निर्दिष्ट समय के भीतर निर्णय नहीं मिलता है, या किसी से व्यथित है। जैसा भी मामला हो, केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी का निर्णय, ऐसी अवधि की समाप्ति से या ऐसे निर्णय की प्राप्ति से तीस दिनों के भीतर ऐसे अधिकारी को अपील कर सकता है जो रैंक में वरिष्ठ है केंद्रीय लोक प्राधिकरण.
बशर्ते कि ऐसा अधिकारी तीस दिन की अवधि की समाप्ति के बाद अपील स्वीकार कर सकता है यदि वह संतुष्ट है कि अपीलकर्ता को समय पर अपील दायर करने से पर्याप्त कारण से रोका गया था।
उत्तर: धारा-19(3): धारा-19 की उप-धारा (1) के तहत निर्णय के खिलाफ दूसरी अपील उस तारीख से 90 (नब्बे) दिनों के भीतर की जाएगी जिस दिन निर्णय लिया जाना चाहिए था या वास्तव में प्राप्त हुआ था, केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग के साथ। बशर्ते कि केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, 90 (नब्बे) दिनों की अवधि की समाप्ति के बाद अपील स्वीकार कर सकता है यदि वह संतुष्ट है कि अपीलकर्ता को पर्याप्त कारण से अपील दायर करने से रोका गया था। समय के भीतर।
उत्तर: धारा-19(3): धारा-19 की उप-धारा (1) के तहत निर्णय के खिलाफ दूसरी अपील उस तारीख से 90 (नब्बे) दिनों के भीतर की जाएगी जिस दिन निर्णय लिया जाना चाहिए था या वास्तव में प्राप्त हुआ था, केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग के साथ। बशर्ते कि केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, 90 (नब्बे) दिनों की अवधि की समाप्ति के बाद अपील स्वीकार कर सकता है यदि वह संतुष्ट है कि अपीलकर्ता को पर्याप्त कारण से अपील दायर करने से रोका गया था। समय के भीतर।
उत्तर: धारा-19(6): धारा 19 (1) या धारा 19(2) के तहत अपील का निपटारा अपील की प्राप्ति के 30 (तीस) दिनों के भीतर या ऐसी विस्तारित अवधि के भीतर किया जाएगा जो कुल 45 (चालीस) से अधिक न हो। -पांच) उसके दाखिल होने की तारीख से, जैसा भी मामला हो, लिखित रूप में कारण दर्ज करने के लिए दिन।
उत्तर: धारा-19(6): धारा 19 (1) या धारा 19(2) के तहत अपील का निपटारा अपील की प्राप्ति के 30 (तीस) दिनों के भीतर या ऐसी विस्तारित अवधि के भीतर किया जाएगा जो कुल 45 (चालीस) से अधिक न हो। -पांच) उसके दाखिल होने की तारीख से, जैसा भी मामला हो, लिखित रूप में कारण दर्ज करने के लिए दिन।
उत्तर: धारा-20(1): जहां केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, किसी शिकायत या अपील पर निर्णय लेते समय यह राय रखता है कि केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य सूचना आयोग जैसा भी मामला हो, अधिकारी ने, बिना किसी उचित कारण के, सूचना के लिए आवेदन प्राप्त करने से इनकार कर दिया है या धारा 7 की उप-धारा (1) के तहत निर्दिष्ट सीमा के भीतर जानकारी प्रदान नहीं की है या दुर्भावनापूर्ण तरीके से जानकारी के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया है या जानबूझकर दिया है। गलत, अधूरी या भ्रामक जानकारी या नष्ट की गई जानकारी जो अनुरोध का विषय थी या जानकारी प्रस्तुत करने में किसी भी तरह से बाधा उत्पन्न हुई, आवेदन प्राप्त होने या जानकारी प्रस्तुत होने तक प्रत्येक दिन 250 रुपये (दो सौ पचास) का जुर्माना लगाया जाएगा। हालाँकि, ऐसे जुर्माने की कुल राशि पच्चीस हजार रुपये से अधिक नहीं होगी।
यह साबित करने का भार कि उसने उचित और लगन से काम किया, केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी, जैसा भी मामला हो, पर होगा।
उत्तर: धारा-20(1): जहां केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग, जैसा भी मामला हो, किसी शिकायत या अपील पर निर्णय लेते समय यह राय रखता है कि केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य सूचना आयोग जैसा भी मामला हो, अधिकारी ने, बिना किसी उचित कारण के, सूचना के लिए आवेदन प्राप्त करने से इनकार कर दिया है या धारा 7 की उप-धारा (1) के तहत निर्दिष्ट सीमा के भीतर जानकारी प्रदान नहीं की है या दुर्भावनापूर्ण तरीके से जानकारी के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया है या जानबूझकर दिया है। गलत, अधूरी या भ्रामक जानकारी या नष्ट की गई जानकारी जो अनुरोध का विषय थी या जानकारी प्रस्तुत करने में किसी भी तरह से बाधा उत्पन्न हुई, आवेदन प्राप्त होने या जानकारी प्रस्तुत होने तक प्रत्येक दिन 250 रुपये (दो सौ पचास) का जुर्माना लगाया जाएगा। हालाँकि, ऐसे जुर्माने की कुल राशि पच्चीस हजार रुपये से अधिक नहीं होगी।
यह साबित करने का भार कि उसने उचित और लगन से काम किया, केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी, जैसा भी मामला हो, पर होगा।
उत्तर: प्रत्येक केंद्रीय विद्यालय में प्राचार्य, सहायक जन सूचना अधिकारी को नामित किया जाता है। जबकि वहां कोई प्रधान पद नहीं है और वहां उपप्रधानाचार्य कार्यरत हैं, उपप्रधानाचार्य को सहायक जन सूचना अधिकारी के रूप में नामित किया गया है। प्रधानाचार्य एवं उप-प्रधानाचार्य दोनों के न होने की स्थिति में वरिष्ठ अध्यापक को संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा सहायक जन सूचना अधिकारी के रूप में नामित किया जाता है। जिस क्षेत्रीय कार्यालय में प्रशासनिक अधिकारी का पद रिक्त होता है, उस क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा वरिष्ठ सहायक आयुक्त को जन सूचना अधिकारी के रूप में नामित किया जाता है।
उत्तर: प्रत्येक केंद्रीय विद्यालय में प्राचार्य, सहायक जन सूचना अधिकारी को नामित किया जाता है। जबकि वहां कोई प्रधान पद नहीं है और वहां उपप्रधानाचार्य कार्यरत हैं, उपप्रधानाचार्य को सहायक जन सूचना अधिकारी के रूप में नामित किया गया है। प्रधानाचार्य एवं उप-प्रधानाचार्य दोनों के न होने की स्थिति में वरिष्ठ अध्यापक को संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा सहायक जन सूचना अधिकारी के रूप में नामित किया जाता है। जिस क्षेत्रीय कार्यालय में प्रशासनिक अधिकारी का पद रिक्त होता है, उस क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा वरिष्ठ सहायक आयुक्त को जन सूचना अधिकारी के रूप में नामित किया जाता है।
उत्तर: 1. धारा 6 की उप-धारा (1) के तहत जानकारी प्राप्त करने के लिए अनुरोध के साथ आवेदन के साथ दस रुपये का आवेदन शुल्क उचित रसीद के आधार पर नकद या जनता के लेखा अधिकारियों को देय डिमांड ड्राफ्ट या बैंकर्स चेक के माध्यम से देना होगा। अधिकार।
2. धारा 7 की उप-धारा (1) के तहत जानकारी प्रदान करने के लिए, शुल्क उचित रसीद के बदले नकद या सार्वजनिक प्राधिकरण के लेखा अधिकारियों को देय डिमांड ड्राफ्ट या बैंकर्स चेक के माध्यम से निम्नलिखित दरों पर लिया जाएगा।
a. बनाए गए या कॉपी किए गए प्रत्येक पृष्ठ (ए-4 या ए-3 आकार के पेपर में) के लिए दो रुपये;
b. बड़े आकार के कागज़ में कॉपी का वास्तविक शुल्क या लागत मूल्य;
c. नमूनों या मॉडलों की वास्तविक लागत या कीमत; और
d. Fया अभिलेखों का निरीक्षण, पहले घंटे के लिए निःशुल्क नहीं; और उसके बाद प्रत्येक पंद्रह मिनट (या उसके अंश) के लिए पांच रुपये का शुल्क।
3. धारा 7 की उप-धारा (5) के तहत जानकारी प्रदान करने के लिए शुल्क उचित रसीद के आधार पर नकद या सार्वजनिक प्राधिकरण के लेखा अधिकारी को देय डिमांड ड्राफ्ट या बैंकर्स चेक के माध्यम से निम्नलिखित दरों पर लिया जाएगा-
a. डिस्केट या फ्लॉपी में दी गई जानकारी के लिए प्रति डिस्केट या फ्लॉपी पचास रुपये; और
b. मुद्रित रूप में उपलब्ध कराई गई जानकारी के लिए ऐसे प्रकाशन के लिए निर्धारित मूल्य या प्रकाशन से उद्धरण के लिए फोटोकॉपी के प्रति पृष्ठ दो रुपये।
उत्तर: 1. धारा 6 की उप-धारा (1) के तहत जानकारी प्राप्त करने के लिए अनुरोध के साथ आवेदन के साथ दस रुपये का आवेदन शुल्क उचित रसीद के आधार पर नकद या जनता के लेखा अधिकारियों को देय डिमांड ड्राफ्ट या बैंकर्स चेक के माध्यम से देना होगा। अधिकार।
2. धारा 7 की उप-धारा (1) के तहत जानकारी प्रदान करने के लिए, शुल्क उचित रसीद के बदले नकद या सार्वजनिक प्राधिकरण के लेखा अधिकारियों को देय डिमांड ड्राफ्ट या बैंकर्स चेक के माध्यम से निम्नलिखित दरों पर लिया जाएगा।
a. बनाए गए या कॉपी किए गए प्रत्येक पृष्ठ (ए-4 या ए-3 आकार के पेपर में) के लिए दो रुपये;
b. बड़े आकार के कागज़ में कॉपी का वास्तविक शुल्क या लागत मूल्य;
c. नमूनों या मॉडलों की वास्तविक लागत या कीमत; और
d. Fया अभिलेखों का निरीक्षण, पहले घंटे के लिए निःशुल्क नहीं; और उसके बाद प्रत्येक पंद्रह मिनट (या उसके अंश) के लिए पांच रुपये का शुल्क।
3. धारा 7 की उप-धारा (5) के तहत जानकारी प्रदान करने के लिए शुल्क उचित रसीद के आधार पर नकद या सार्वजनिक प्राधिकरण के लेखा अधिकारी को देय डिमांड ड्राफ्ट या बैंकर्स चेक के माध्यम से निम्नलिखित दरों पर लिया जाएगा-
a. डिस्केट या फ्लॉपी में दी गई जानकारी के लिए प्रति डिस्केट या फ्लॉपी पचास रुपये; और
b. मुद्रित रूप में उपलब्ध कराई गई जानकारी के लिए ऐसे प्रकाशन के लिए निर्धारित मूल्य या प्रकाशन से उद्धरण के लिए फोटोकॉपी के प्रति पृष्ठ दो रुपये।
उत्तर: एक आवेदक जो आरटीआई अधिनियम, 2005 के तहत जानकारी प्राप्त करना चाहता है, वह इस आरटीआई ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से केंद्रीय केंद्रीय विद्यालय संगठन और ऑनलाइन आरटीआई अनुरोध फॉर्म में उल्लिखित अन्य केंद्रीय सार्वजनिक प्राधिकरणों को अनुरोध कर सकता है।
उत्तर: एक आवेदक जो आरटीआई अधिनियम, 2005 के तहत जानकारी प्राप्त करना चाहता है, वह इस आरटीआई ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से केंद्रीय केंद्रीय विद्यालय संगठन और ऑनलाइन आरटीआई अनुरोध फॉर्म में उल्लिखित अन्य केंद्रीय सार्वजनिक प्राधिकरणों को अनुरोध कर सकता है।
उत्तर: आवेदन का पाठ आरटीआई अनुरोध प्रपत्र के निर्धारित कॉलम में लिखा जा सकता है। वर्तमान में, एप्लिकेशन का टेक्स्ट केवल 3000 अक्षरों तक ही सीमित है। यदि किसी एप्लिकेशन के टेक्स्ट में 3000 से अधिक अक्षर हैं, तो इसे फॉर्म के “सहायक दस्तावेज़” कॉलम में पीडीएफ अनुलग्नक के रूप में अपलोड किया जा सकता है।
उत्तर: आवेदन का पाठ आरटीआई अनुरोध प्रपत्र के निर्धारित कॉलम में लिखा जा सकता है। वर्तमान में, एप्लिकेशन का टेक्स्ट केवल 3000 अक्षरों तक ही सीमित है। यदि किसी एप्लिकेशन के टेक्स्ट में 3000 से अधिक अक्षर हैं, तो इसे फॉर्म के “सहायक दस्तावेज़” कॉलम में पीडीएफ अनुलग्नक के रूप में अपलोड किया जा सकता है।
उत्तर: आरटीआई अनुरोध फॉर्म के पहले पृष्ठ को भरने के बाद, एक गैर-बीपीएल आवेदक को निर्धारित आरटीआई शुल्क के भुगतान के लिए “भुगतान करें” बटन पर क्लिक करना होगा।
आवेदक निम्नलिखित तरीकों से निर्धारित आरटीआई शुल्क का भुगतान कर सकता है:
i.
i. एसबीआई और उसके संबद्ध बैंकों के माध्यम से इंटरनेट बैंकिंग।
ii. भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम-सह-डेबिट कार्ड का उपयोग करना।
iii. मास्टर/वीज़ा का क्रेडिट/डेबिट कार्ड।
यह ध्यान दिया जा सकता है कि आरटीआई नियम, 2012 के अनुसार, गरीबी रेखा से नीचे के नागरिक को कोई आरटीआई शुल्क का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, बीपीएल आवेदक को इस संबंध में उपयुक्त सरकार द्वारा जारी प्रमाण पत्र की एक प्रति संलग्न करनी होगी। आवेदन के साथ.
उत्तर: आरटीआई अनुरोध फॉर्म के पहले पृष्ठ को भरने के बाद, एक गैर-बीपीएल आवेदक को निर्धारित आरटीआई शुल्क के भुगतान के लिए “भुगतान करें” बटन पर क्लिक करना होगा।
आवेदक निम्नलिखित तरीकों से निर्धारित आरटीआई शुल्क का भुगतान कर सकता है:
i.
i. एसबीआई और उसके संबद्ध बैंकों के माध्यम से इंटरनेट बैंकिंग।
ii. भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम-सह-डेबिट कार्ड का उपयोग करना।
iii. मास्टर/वीज़ा का क्रेडिट/डेबिट कार्ड।
यह ध्यान दिया जा सकता है कि आरटीआई नियम, 2012 के अनुसार, गरीबी रेखा से नीचे के नागरिक को कोई आरटीआई शुल्क का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, बीपीएल आवेदक को इस संबंध में उपयुक्त सरकार द्वारा जारी प्रमाण पत्र की एक प्रति संलग्न करनी होगी। आवेदन के साथ.
उत्तर: आवेदन जमा करने पर, एक अद्वितीय पंजीकरण संख्या जारी की जाएगी, जिसे आवेदक द्वारा भविष्य में किसी भी संदर्भ के लिए संदर्भित किया जा सकता है। यह ध्यान दिया जा सकता है कि इस आरटीआई ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दायर किया गया आवेदन इलेक्ट्रॉनिक रूप से उक्त केंद्रीय विद्यालय संगठन के “नोडल अधिकारी” के पास पहुंचेगा और “नहीं” संबंधित केंद्रीय विद्यालय संगठन के सीपीआईओ के पास पहुंचेगा।.
नोडल अधिकारी आरटीआई आवेदन को संबंधित सीपीआईओ को इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रेषित करेगा।”
उत्तर: आवेदन जमा करने पर, एक अद्वितीय पंजीकरण संख्या जारी की जाएगी, जिसे आवेदक द्वारा भविष्य में किसी भी संदर्भ के लिए संदर्भित किया जा सकता है। यह ध्यान दिया जा सकता है कि इस आरटीआई ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दायर किया गया आवेदन इलेक्ट्रॉनिक रूप से उक्त केंद्रीय विद्यालय संगठन के “नोडल अधिकारी” के पास पहुंचेगा और “नहीं” संबंधित केंद्रीय विद्यालय संगठन के सीपीआईओ के पास पहुंचेगा।.
नोडल अधिकारी आरटीआई आवेदन को संबंधित सीपीआईओ को इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रेषित करेगा।”
उत्तर: यदि आरटीआई आवेदन उस सार्वजनिक प्राधिकरण के लिए नहीं है जिसे आवेदक द्वारा चुना गया है, तो उक्त सार्वजनिक प्राधिकरण का “नोडल अधिकारी” आवेदन को इलेक्ट्रॉनिक रूप से संबंधित केंद्रीय सार्वजनिक प्राधिकरण के “नोडल अधिकारी” को स्थानांतरित कर देगा। यदि आरटीआई अधिनियम की धारा 6(3) के तहत इस पोर्टल से जुड़ा हुआ है और भौतिक रूप से उस केंद्रीय सार्वजनिक प्राधिकरण से जुड़ा है जो इस पोर्टल से जुड़ा नहीं है।
यह ध्यान दिया जा सकता है कि इस पोर्टल के माध्यम से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सहित राज्य के सार्वजनिक प्राधिकरणों के लिए दायर आरटीआई आवेदन बिना किसी शुल्क वापसी के वापस कर दिए जाएंगे।
उत्तर: यदि आरटीआई आवेदन उस सार्वजनिक प्राधिकरण के लिए नहीं है जिसे आवेदक द्वारा चुना गया है, तो उक्त सार्वजनिक प्राधिकरण का “नोडल अधिकारी” आवेदन को इलेक्ट्रॉनिक रूप से संबंधित केंद्रीय सार्वजनिक प्राधिकरण के “नोडल अधिकारी” को स्थानांतरित कर देगा। यदि आरटीआई अधिनियम की धारा 6(3) के तहत इस पोर्टल से जुड़ा हुआ है और भौतिक रूप से उस केंद्रीय सार्वजनिक प्राधिकरण से जुड़ा है जो इस पोर्टल से जुड़ा नहीं है।
यह ध्यान दिया जा सकता है कि इस पोर्टल के माध्यम से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सहित राज्य के सार्वजनिक प्राधिकरणों के लिए दायर आरटीआई आवेदन बिना किसी शुल्क वापसी के वापस कर दिए जाएंगे।
उत्तर: – यदि जानकारी प्रदान करने के लिए लागत का अतिरिक्त शुल्क आवश्यक है, तो सीपीआईओ इसकी सूचना देगा, जिसे आवेदक आरटीआई ऑनलाइन पोर्टल में “स्थिति देखें” विकल्प और एक ई-मेल अलर्ट या एसएमएस के माध्यम से देख सकता है। या दोनों को भी इसके लिए आवेदक को भेजा जाएगा। अतिरिक्त शुल्क के ऑनलाइन भुगतान के लिए, आवेदक को आरटीआई ऑनलाइन पोर्टल में ‘स्थिति देखें’ विकल्प का उपयोग करना होगा और अनुरोध की पंजीकरण संख्या प्रदान करने पर, “भुगतान करें” का विकल्प उपलब्ध होगा।
उत्तर: – यदि जानकारी प्रदान करने के लिए लागत का अतिरिक्त शुल्क आवश्यक है, तो सीपीआईओ इसकी सूचना देगा, जिसे आवेदक आरटीआई ऑनलाइन पोर्टल में “स्थिति देखें” विकल्प और एक ई-मेल अलर्ट या एसएमएस के माध्यम से देख सकता है। या दोनों को भी इसके लिए आवेदक को भेजा जाएगा। अतिरिक्त शुल्क के ऑनलाइन भुगतान के लिए, आवेदक को आरटीआई ऑनलाइन पोर्टल में ‘स्थिति देखें’ विकल्प का उपयोग करना होगा और अनुरोध की पंजीकरण संख्या प्रदान करने पर, “भुगतान करें” का विकल्प उपलब्ध होगा।
उत्तर: प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के पास अपील करने के लिए, आवेदक को आरटीआई ऑनलाइन पोर्टल में “प्रथम अपील सबमिट करें” विकल्प का चयन करना होगा और जो फॉर्म दिखाई देगा उसे भरना होगा।
प्रथम अपील दायर करने के लिए मूल आवेदन का पंजीकरण नंबर और ई-मेल आईडी आवश्यक है।
उत्तर: प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के पास अपील करने के लिए, आवेदक को आरटीआई ऑनलाइन पोर्टल में “प्रथम अपील सबमिट करें” विकल्प का चयन करना होगा और जो फॉर्म दिखाई देगा उसे भरना होगा।
प्रथम अपील दायर करने के लिए मूल आवेदन का पंजीकरण नंबर और ई-मेल आईडी आवश्यक है।
उत्तर: आरटीआई अधिनियम के अनुसार, प्रथम अपील के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ता है।
उत्तर: आरटीआई अधिनियम के अनुसार, प्रथम अपील के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ता है।
उत्तर: हालांकि वैकल्पिक, एसएमएस अलर्ट प्राप्त करने के लिए आवेदक/अपीलकर्ता द्वारा मोबाइल नंबर प्रदान किया जा सकता है।
उत्तर: हालांकि वैकल्पिक, एसएमएस अलर्ट प्राप्त करने के लिए आवेदक/अपीलकर्ता द्वारा मोबाइल नंबर प्रदान किया जा सकता है।
उत्तर: आपको प्रमाणपत्र त्रुटि को नजरअंदाज करना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए। कृपया चुनें,
• Mozilla Firefox – मैं जोखिम जोड़ने के अपवाद को समझता हूं।
• Google Chrome – फिर भी आगे बढ़ें।
• Internet Explorer – इस वेबसाइट पर जारी रखें
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उत्तर: नहीं। आप सीधे “सबमिट रिक्वेस्ट” टैब पर अपनी आरटीआई दाखिल कर सकते हैं।
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उत्तर: आप अपना पासवर्ड रीसेट करने का अनुरोध करते हुए आरटीआई हेल्पडेस्क पर कॉल कर सकते हैं या helprtionline-dopt[at]nic[dot]in पर एक ई-मेल भेज सकते हैं।
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उत्तर: नहीं
उत्तर: पंजीकरण के दौरान प्रदान की गई आपकी ईमेल आईडी पर एक सक्रियण कुंजी भेजी जाएगी। इस सक्रियकरण कुंजी का उपयोग पहली बार लॉगिन पर खाते को सक्रिय करने के लिए किया जा सकता है। पहली बार लॉगिन करने के बाद या उपयोगकर्ता खाते को सक्रिय करने से पहले सक्रियण कुंजी के पुन: निर्माण का प्रावधान भी उपलब्ध है। नई सक्रियण कुंजी आपके पंजीकृत ईमेल-आईडी पर भेजी जाएगी।
उत्तर: पंजीकरण के दौरान प्रदान की गई आपकी ईमेल आईडी पर एक सक्रियण कुंजी भेजी जाएगी। इस सक्रियकरण कुंजी का उपयोग पहली बार लॉगिन पर खाते को सक्रिय करने के लिए किया जा सकता है। पहली बार लॉगिन करने के बाद या उपयोगकर्ता खाते को सक्रिय करने से पहले सक्रियण कुंजी के पुन: निर्माण का प्रावधान भी उपलब्ध है। नई सक्रियण कुंजी आपके पंजीकृत ईमेल-आईडी पर भेजी जाएगी।
उत्तर: कृपया 48 कार्य घंटों तक प्रतीक्षा करें क्योंकि पंजीकरण संख्या मिलान के बाद उत्पन्न होगी। यदि यह 48 घंटों के भीतर उत्पन्न नहीं होता है तो कृपया अपने लेनदेन विवरण के साथ helprtionline-dopt[at]nic[dot]in पर एक ई-मेल भेजें।
उत्तर: कृपया 48 कार्य घंटों तक प्रतीक्षा करें क्योंकि पंजीकरण संख्या मिलान के बाद उत्पन्न होगी। यदि यह 48 घंटों के भीतर उत्पन्न नहीं होता है तो कृपया अपने लेनदेन विवरण के साथ helprtionline-dopt[at]nic[dot]in पर एक ई-मेल भेजें।
उत्तर: ऐसा निम्नलिखित दो स्थितियों में हो सकता है:
1. जब आपका आरटीआई आवेदन भौतिक रूप से अन्य सार्वजनिक प्राधिकरण को स्थानांतरित कर दिया गया हो, जो इस पोर्टल से जुड़ा नहीं है। ऐसे मामले में, आपको संबंधित सार्वजनिक प्राधिकरण को भौतिक मोड में अपनी अपील दायर करनी होगी।
2. एक अन्य मामला यह हो सकता है कि आपके आरटीआई आवेदन का सीपीआईओ द्वारा उत्तर नहीं दिया गया है और 30 दिन की अवधि समाप्त नहीं हुई है। ऐसे मामले में आप 30 दिन की निर्धारित समयावधि पूरी होने के बाद ही प्रथम अपील दायर कर सकते हैं।
उत्तर: ऐसा निम्नलिखित दो स्थितियों में हो सकता है:
1. जब आपका आरटीआई आवेदन भौतिक रूप से अन्य सार्वजनिक प्राधिकरण को स्थानांतरित कर दिया गया हो, जो इस पोर्टल से जुड़ा नहीं है। ऐसे मामले में, आपको संबंधित सार्वजनिक प्राधिकरण को भौतिक मोड में अपनी अपील दायर करनी होगी।
2. एक अन्य मामला यह हो सकता है कि आपके आरटीआई आवेदन का सीपीआईओ द्वारा उत्तर नहीं दिया गया है और 30 दिन की अवधि समाप्त नहीं हुई है। ऐसे मामले में आप 30 दिन की निर्धारित समयावधि पूरी होने के बाद ही प्रथम अपील दायर कर सकते हैं।
उत्तर: कृपया भ्रमित न हों। पासवर्ड एन्क्रिप्शन एक सुरक्षा उपाय है. जब भी आप अपना पासवर्ड डालते हैं तो यह तुरंत एन्क्रिप्ट हो जाता है। अपना खाता पंजीकृत करते समय कृपया दो क्षेत्रों में एक ही पासवर्ड प्रदान करें अर्थात क्रमशः पासवर्ड और पुष्टि पासवर्ड फ़ील्ड.
उत्तर: कृपया भ्रमित न हों। पासवर्ड एन्क्रिप्शन एक सुरक्षा उपाय है. जब भी आप अपना पासवर्ड डालते हैं तो यह तुरंत एन्क्रिप्ट हो जाता है। अपना खाता पंजीकृत करते समय कृपया दो क्षेत्रों में एक ही पासवर्ड प्रदान करें अर्थात क्रमशः पासवर्ड और पुष्टि पासवर्ड फ़ील्ड.
उत्तर: नहीं, ऑनलाइन प्रथम अपील केवल पहले से दायर ऑनलाइन आरटीआई आवेदन के खिलाफ ही दायर की जा सकती है।
उत्तर: नहीं, ऑनलाइन प्रथम अपील केवल पहले से दायर ऑनलाइन आरटीआई आवेदन के खिलाफ ही दायर की जा सकती है।
उत्तर: यदि आपने सीधे यानी अपने उपयोगकर्ता खाते में लॉग इन किए बिना आरटीआई या प्रथम अपील दायर करने का विकल्प चुना है, तो ऐसे मामलों में आप अपने पंजीकृत खाते के इतिहास में दायर की गई आरटीआई या अपील नहीं देख पाएंगे।
उत्तर: यदि आपने सीधे यानी अपने उपयोगकर्ता खाते में लॉग इन किए बिना आरटीआई या प्रथम अपील दायर करने का विकल्प चुना है, तो ऐसे मामलों में आप अपने पंजीकृत खाते के इतिहास में दायर की गई आरटीआई या अपील नहीं देख पाएंगे।
उत्तर: यह वह मामला है जहां आपके आरटीआई आवेदन को कई सीपीआईओ को भेज दिया गया है क्योंकि मांगी गई जानकारी एक से अधिक पीआईओ के पास है।
उत्तर: यह वह मामला है जहां आपके आरटीआई आवेदन को कई सीपीआईओ को भेज दिया गया है क्योंकि मांगी गई जानकारी एक से अधिक पीआईओ के पास है।
उत्तर: आरटीआई आवेदन या ऑनलाइन दायर की गई प्रथम अपील की स्थिति/उत्तर को आवेदक “स्थिति देखें” पर क्लिक करके देख सकता है।
उत्तर: आरटीआई आवेदन या ऑनलाइन दायर की गई प्रथम अपील की स्थिति/उत्तर को आवेदक “स्थिति देखें” पर क्लिक करके देख सकता है।
उत्तर: पंजीकरण संख्या उन मामलों के लिए बैंक स्क्रॉल के मिलान के बाद उत्पन्न होती है जिनके नंबर भुगतान के तुरंत बाद उत्पन्न नहीं होते हैं। इस प्रक्रिया में 48 कार्य घंटे लग सकते हैं. यदि किसी को अभी भी पंजीकरण संख्या प्राप्त नहीं हुई है, तो वे राशि की वापसी के लिए अपने संबंधित बैंक से संपर्क कर सकते हैं।
उत्तर: पंजीकरण संख्या उन मामलों के लिए बैंक स्क्रॉल के मिलान के बाद उत्पन्न होती है जिनके नंबर भुगतान के तुरंत बाद उत्पन्न नहीं होते हैं। इस प्रक्रिया में 48 कार्य घंटे लग सकते हैं. यदि किसी को अभी भी पंजीकरण संख्या प्राप्त नहीं हुई है, तो वे राशि की वापसी के लिए अपने संबंधित बैंक से संपर्क कर सकते हैं।
उत्तर: जब कोई सार्वजनिक प्राधिकरण सहायक दस्तावेज़ के लिए अनुरोध करता है, तो आवेदक को उसके मोबाइल या ईमेल आईडी पर एक अलर्ट भेजा जाता है। ऐसी स्थिति में, आवेदक से अनुरोध है कि वह आरटीआई ऑनलाइन वेबसाइट पर जाएं और ‘स्थिति देखें’ में विवरण दर्ज करें। एक बार विवरण दर्ज करने के बाद, सहायक दस्तावेज़ अपलोड करने के विकल्प के साथ आरटीआई आवेदन की वर्तमान स्थिति दिखाई जाती है।
उत्तर: जब कोई सार्वजनिक प्राधिकरण सहायक दस्तावेज़ के लिए अनुरोध करता है, तो आवेदक को उसके मोबाइल या ईमेल आईडी पर एक अलर्ट भेजा जाता है। ऐसी स्थिति में, आवेदक से अनुरोध है कि वह आरटीआई ऑनलाइन वेबसाइट पर जाएं और ‘स्थिति देखें’ में विवरण दर्ज करें। एक बार विवरण दर्ज करने के बाद, सहायक दस्तावेज़ अपलोड करने के विकल्प के साथ आरटीआई आवेदन की वर्तमान स्थिति दिखाई जाती है।
उत्तर: हेल्पलाइन मेल आईडी विशेष रूप से इस पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आरटीआई दाखिल करते समय आने वाले प्रश्नों या समस्या के लिए है। कृपया किसी अन्य मामले के लिए या कोई अन्य विवरण मांगने के लिए इस हेल्पलाइन पर मेल न भेजें। जवाब केवल केंद्र सरकार के आरटीआई ऑनलाइन पोर्टल तक ही सीमित है।
उत्तर: हेल्पलाइन मेल आईडी विशेष रूप से इस पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आरटीआई दाखिल करते समय आने वाले प्रश्नों या समस्या के लिए है। कृपया किसी अन्य मामले के लिए या कोई अन्य विवरण मांगने के लिए इस हेल्पलाइन पर मेल न भेजें। जवाब केवल केंद्र सरकार के आरटीआई ऑनलाइन पोर्टल तक ही सीमित है।
उत्तर: आवेदन इनमें से कोई भी हो सकता है:
1.
1. अंग्रेज़ी,
2. हिन्दी, या
3. उस क्षेत्र की आधिकारिक भाषा जिसमें आवेदन किया जा रहा है।
पूर्ववर्ती सीआईसी (प्रबंधन) विनियमन, 2007 के नियम 26 के अनुसार, जिसे दिल्ली उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया है, दूसरी अपील या इसका उत्तर केवल अंग्रेजी या हिंदी में सीआईसी के समक्ष दायर किया जा सकता है या प्रमाणित के साथ होना चाहिए। इसका अंग्रेजी या हिंदी में अनुवादित संस्करण।
उत्तर: आवेदन इनमें से कोई भी हो सकता है:
1.
1. अंग्रेज़ी,
2. हिन्दी, या
3. उस क्षेत्र की आधिकारिक भाषा जिसमें आवेदन किया जा रहा है।
पूर्ववर्ती सीआईसी (प्रबंधन) विनियमन, 2007 के नियम 26 के अनुसार, जिसे दिल्ली उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया है, दूसरी अपील या इसका उत्तर केवल अंग्रेजी या हिंदी में सीआईसी के समक्ष दायर किया जा सकता है या प्रमाणित के साथ होना चाहिए। इसका अंग्रेजी या हिंदी में अनुवादित संस्करण।
उत्तर:
- आवेदक भारत का नागरिक होना चाहिए।
- आवेदन में मांगी गई जानकारी का विवरण होना चाहिए।
- आवेदन शुल्क के भुगतान का साक्ष्य संलग्न किया जाना चाहिए।
- उत्तर भेजने के लिए आवेदक का पता उपलब्ध होना चाहिए।
किसी आवेदक से संपर्क करने के लिए आवश्यक विवरणों को छोड़कर व्यक्तिगत विवरण का न तो उल्लेख करना आवश्यक है और न ही पीआईओ द्वारा मांगा जा सकता है।
उत्तर:
- आवेदक भारत का नागरिक होना चाहिए।
- आवेदन में मांगी गई जानकारी का विवरण होना चाहिए।
- आवेदन शुल्क के भुगतान का साक्ष्य संलग्न किया जाना चाहिए।
- उत्तर भेजने के लिए आवेदक का पता उपलब्ध होना चाहिए।
किसी आवेदक से संपर्क करने के लिए आवश्यक विवरणों को छोड़कर व्यक्तिगत विवरण का न तो उल्लेख करना आवश्यक है और न ही पीआईओ द्वारा मांगा जा सकता है।
उत्तर: आरटीआई अधिनियम किसी एक आवेदन में पूछे जाने वाले प्रश्नों की संख्या या किसी आवेदन को शब्दों की संख्या तक सीमित करने की कोई सीमा निर्धारित नहीं करता है। हालाँकि, कई सार्वजनिक प्राधिकरणों में फैले कई मुद्दों को कवर करने वाला एक बहुत लंबा आवेदन यह आभास देता है कि आवेदक गंभीर नहीं है और उसका इरादा सार्वजनिक प्राधिकरण को परेशान करना है। इसलिए, एक आवेदक को कई सार्वजनिक प्राधिकरणों से संबंधित अनुरोधों की एक श्रृंखला को एक आवेदन में बंडल करने से बचना चाहिए। उन्हें अधिमानतः अलग-अलग आवेदनों के रूप में तैयार किया जाना चाहिए और तदनुसार भुगतान किया जाना चाहिए।
उत्तर: आरटीआई अधिनियम किसी एक आवेदन में पूछे जाने वाले प्रश्नों की संख्या या किसी आवेदन को शब्दों की संख्या तक सीमित करने की कोई सीमा निर्धारित नहीं करता है। हालाँकि, कई सार्वजनिक प्राधिकरणों में फैले कई मुद्दों को कवर करने वाला एक बहुत लंबा आवेदन यह आभास देता है कि आवेदक गंभीर नहीं है और उसका इरादा सार्वजनिक प्राधिकरण को परेशान करना है। इसलिए, एक आवेदक को कई सार्वजनिक प्राधिकरणों से संबंधित अनुरोधों की एक श्रृंखला को एक आवेदन में बंडल करने से बचना चाहिए। उन्हें अधिमानतः अलग-अलग आवेदनों के रूप में तैयार किया जाना चाहिए और तदनुसार भुगतान किया जाना चाहिए।
उत्तर: आमतौर पर आवेदन के साथ नागरिकता का कोई सबूत जमा करने की आवश्यकता नहीं होती है और न ही पीआईओ से सबूत मांगने की अपेक्षा की जाती है। हालाँकि, कुछ असाधारण परिस्थितियों में, एक पीआईओ सबूत मांग सकता है, उदाहरण के लिए, यदि उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि आवेदन किसी नागरिक द्वारा दायर नहीं किया गया है या यदि कोई संदेह है कि आवेदक भारतीय नागरिक है या नहीं।
उत्तर: आमतौर पर आवेदन के साथ नागरिकता का कोई सबूत जमा करने की आवश्यकता नहीं होती है और न ही पीआईओ से सबूत मांगने की अपेक्षा की जाती है। हालाँकि, कुछ असाधारण परिस्थितियों में, एक पीआईओ सबूत मांग सकता है, उदाहरण के लिए, यदि उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि आवेदन किसी नागरिक द्वारा दायर नहीं किया गया है या यदि कोई संदेह है कि आवेदक भारतीय नागरिक है या नहीं।
उत्तर: आवश्यक फोटोकॉपी अपेक्षित शुल्क जमा करने के बाद ही प्रदान की जा सकती है, इसलिए आवेदक लेखा अधिकारी, केंद्रीय विद्यालय संगठन (मुख्यालय) के पक्ष में दिल्ली में देय नकद/डीडी या बैंकर्स चेक या आईपीओ के रूप में जमा कर सकते हैं।
उत्तर: आवश्यक फोटोकॉपी अपेक्षित शुल्क जमा करने के बाद ही प्रदान की जा सकती है, इसलिए आवेदक लेखा अधिकारी, केंद्रीय विद्यालय संगठन (मुख्यालय) के पक्ष में दिल्ली में देय नकद/डीडी या बैंकर्स चेक या आईपीओ के रूप में जमा कर सकते हैं।